यीशु कौन है

 

यीशु कौन है
यीशु मसीह के बारे में सीखने का सर्वोतम साध्‍न बाइबल है। एल्‍टन जी. हिल द्वारा लिखित एवं लूईस जीटर वॉकर द्वारा अनुदित यह पाठ्‌यक्रम यीशु मसीह के जन्‍म से लेकर उसके दूसरे आगमन से संबंध्‍ति भविष्‍यद्वाणियों तक के यीशु के जीवन का ब्‍यौरा देता है। इस पाठ्‌यक्रम के अंत में हर पाठक को यीशु मसीह से मिलने का आमंत्राण है।
 
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अध्‍याय 1: यीशु के बारे में जानना

क्‍या मैं आपसे एक प्रश्‍न पूछूँ? आपके विचार में, यीशु कौन है? कुछ लोग कहते हैं, ‘‘वह एक महान शिक्षक था', कुछ अन्‍य कहते हैं, वह एक भविष्‍यद्वक्‍ता था, एक विदेशी परमेश्‍वर था, या एक भला व्‍यक्‍ति था जिसको हम नमूना बना सकते हैं।
यीशु एक महान शिक्षक और भविष्‍यद्वक्‍ता थे, परंतु वे उससे भी बढ़कर थे। वे एक तत्वशस्त्रि या हमारे नमूने से भी बढ़कर थे। इस अध्‍याय में हम यीशु के बारे में अध्‍कि जानेंगे।
 
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अध्‍याय 2: यीशु, वायदारत मसीहा

वायदे हमारे जीवन के भाग हैं। हम सबको हमें दिए गए वायदों को पूरा होते हुए देखने के लिए इुतजार करना पड़ा है। कई बार तो, बहुत अध्‍कि समय! और कई बार हम निराश भी हुए हैं।
परमेश्‍वर ने भी वायदे किये हैं। यीशु मसीह के जन्‍म से शताब्‍दियों पहले, परमेश्‍वर ने वायदा किया कि मसीहा आएगा। वह अपने भविष्‍यद्वक्‍ताओं के द्वारा इस व्‍यक्‍ति और उसके कार्य के बारे में बोला
 
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अध्‍याय 3: यीशु, परमेश्‍वर का पुत्र

परमेश्‍वर के बारे में कुछ तथ्‍यों को समझना कुछ अन्‍य तथ्‍यों से आसान है। उदाहरण, हम बेपरेशानी, समझ सकते हैं कि एक पिता के समान परमेश्‍वर कैसे हैं। हमने देखा है कि अच्‍छे पिता अपने बच्‍चों की संभाल और प्रेम करते हैं।
प्‍रमेश्‍वर के बारे में कुछ तथ्‍य समझने आसान नही हैं। और ऐसा ही एक तथ्‍य इस अध्‍याय का विषय है - यह तथ्‍य कि यीशु परमेश्‍वर का पुत्र है।
 
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अध्‍याय 4: यीशु, मनुष्‍य का पुत्र

पूरे बृह्माण्‍ड में, यीशु विशेष हैं। कोई भी उनके समान नही है, क्‍योंकि वह परमेश्‍वर और मनुष्‍य दोनो है। यही बाइबल सिखाती है।
परंतु यीशु मनुष्‍य क्‍यों बनना चाहते थे? उनका कार्य तो उस ध्‍नी व्‍यक्‍ति के समान हो गया जो अपना महल और सब कुछ छोड़कर गरीब बनने को चला गया हो। ऐसे सामर्थी राजा के समान जिसने उसका आदर करने और आज्ञा मानने वाले सबको छोड़कर घृणित और तिरस्‍कृत हो गया।
 
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अध्‍याय 5: यीशु, वचन

क्‍या आप कल्‍पना कर सकते हैं कि यदि आप बोल नही सकते हैं तो आपको कैसा लगेगा? दूसरों से बातचीत करने का कोई तरीका नही? ओह! भयानक अकेलापन और हताशा!
बातचीत करने की हमारी योग्‍यता हमारे सृष्‍टिकर्ता परमेश्‍वर से आती है। वह चाहता है कि हम उसे जानें। यीशु मसीह उस सब का आदि और अंत है जो वह हमें बताना चाहते हैं।
 
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अध्‍याय 6: यीशु, जगत की रोशनी
क्‍या आप कभी अंध्‍ेरे में चले हैं और चाहा है कि काश रोशनी होती तो? आप कभी नही जान सकते कि आपके किसी ओर या सामने किस प्रकार का खतरा है। आप आसानी से समझ सकते हैं कि बाइबल अंध्‍ेरे को दुष्‍टता, अनिश्‍चयता, मुसिबत और मृत्‍यु का प्रतीक बताती है। ये सारी चीजें हीं डर और संदेह पैदा करती हैं।
 
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अध्‍याय 7: यीशु, चंगाईकर्ता और बपतिस्‍मादाता
अध्‍याय 7: यीशु, चंगाईकर्ता और बपतिस्‍मादाता आपने यीशु के बारे में बहुत कुछ जान लिया है! आपने सीखा कि वह वायदारत मसीहा है, परमेश्‍वर का पुत्र है, मनुष्‍य का पुत्र है, परमेश्‍वर का वचन है और जगत की रोशनी है। ये सो शीर्षक हमें यीशु कौन है के बारे में महत्‍वपूर्ण सच बताते हैं। यीशु मसीह के कार्यों को देखने से भी उसके प्रति हमें जानकारी मिलती है। इस अध्‍याय में हम उसके दो कार्यों को देखेंगेः यीशु हमारे शरीर और प्राण को चंगा करता है और यीशु हमें पवित्रात्मा का बपतिस्‍मा देता है।
 
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अध्‍याय 8: यीशु, मुक्‍तिदाता, उद्धारकर्ता
आपने देखा कि यीशु मसीह चंगाई और पवित्रात्मा का बपतिस्‍मा देता है। परंतु वह हमारे लिए इससे भी महत्‍वपूर्ण कार्य करता हैः यीशु बचाता है। बाइबल कहती है कि यीशु मसीह खोए हुओं को खोजने और उन्‍हे बचाने आया। यह साधरण सा वाक्‍य मसीही धर्म का संपूर्ण अर्थ है। हमारे धर्म जीवन के महान विचारों को देने का प्रयत्‍न करते हैं। परंतु वे अपने अनुयाईयों को बुराई पर विजय पाने की असली ताकत नही देते हैं।
 
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अध्‍याय 9: यीशु, पुनरूत्‍थान और जीवन
मृत्‍यु हर मनुष्‍य के पथ पर खड़ी है - दृढ़, नही हटने वाली और अंतिम। धनी और गरीब सभी इसका सामना करेंगे। अध्‍कितर लोगों के लिए मृत्‍यु का विचार तक डर पैदा कर देता है। परंतु यीशु मसीह पर विश्‍वास करने वालों में, एक स्‍पष्‍ट अंतर है। उन्‍हे मृत्‍यु से डरने की जरूरत नही है। क्‍यों? क्‍योंकि उन्‍होने अपना भरोसा उस पर डाला है जो स्‍वयं पुनरूत्‍थान और जीवन है।
 
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अध्‍याय 10: यीशु मसीह, प्रभु
समाज में हमेशा दूसरों पर अधिकार रखने वाले लोग मिल जाते हैं। यीशु मसीह के जन्‍म पर भी समाज कोई अलग नही था। रोम को मसीहियों ने उखाड़ नही पेंफका था। यीशु वापिस स्‍वर्ग में गए, और आज संसार प्रताड़कों, सताने वालों से भरा पड़ा है। वह प्रभु कैसे हो सकता है? उसके पास कैसा अधिकार है? वह सब पर कब राज करेगा? इन प्रश्‍नों का यह अध्‍याय उत्तर देता है।
 
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