प्रार्थना और आराध्‍ना

 

प्रार्थना और आराध्‍ना
आराध्‍ना में परमेश्‍वर की स्‍तूति एवं सेवा शामिल हैं। लेखक मोरिस विलयम्‍स प्रार्थना और आराध्‍ना के नए जीवन का परिचय करवा रहे हैं। यीशु के द्वारा अपने चेलों को सिखाई गई प्रार्थना को नजदीक से देखने पर हमें दिखता है कि यीशु मसीह के अनुसार, हम हमारे जीवन से प्रार्थना और आराध्‍ना को अलग नही कर सकते हैं। प्रार्थना कभी समाप्‍त नही होती। यह हमारे द्वारा किए जाने वाले हर कार्य का हिस्‍सा है। इस पाठ्‌यक्रम में, प्रार्थना को आराध्‍ना की तैयारी के रूप में एवं आराध्‍ना को परमेश्‍वर को प्रसन्न कर उसके उद्देश्‍य को पूरा करने वाले जीवन से परिभाषित किया गया है।
 
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पाठ 1: किससे प्रार्थना करें?
इस पाठ में हम सच्‍चे परमेश्‍वर और उससे प्रार्थना करने के बारे में सीखेंगे। हम परमेश्‍वर के लिए महत्‍वपूर्ण चीजों के बारे में पढ़ेंगे ताकि हम उसकी इच्‍छानुसार प्रार्थना कर सकें।
 
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पाठ 2: एक पारिवारिक सम्बन्ध
प्रार्थना की शुरुआत स्‍वयं की पहचान के बाद हो। यदि हम जानते हैं कि हम परमेश्‍वर के पुत्र हैं, तो प्रार्थना के दौरान यह हमें ढ़ाढ़स देगा। यह जानना बहुत अच्‍छी बात है कि हमारा पिता हमसे प्रेम करता एवं हमारी जरूरतों को पूरा करता है।
 
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पाठ 3: एक राज्‍यीय नागरिकता

जब हम प्रार्थना और आराध्‍ना की बात कर रहे हैं तो स्‍वर्ग के बारे में क्‍यों लिखे? एक अच्‍छा कारण! यदि हम उचित तरीके से प्रार्थना करना चाहते हैं तो हमें जानना है कि हम कौन हैं एवं कहाँ के हैं। हमारा प्रार्थना किए जाने वाले से एक सही संबंध्‍ का होना जरूरी है। हम एसे बातों के बारे में बात करनी जिसमें दोनों इच्‍छुक हों।
स्‍वर्ग एक वास्‍तविक जगह है और परमेश्‍वर के बच्‍चे वहाँ जा रहे हैं। क्‍यों, तो क्‍या हमें इसके बारे में प्रार्थना नही करनी है?
 
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पाठ 4: एक राजा जिसकी आराध्‍ना करनी है

प्रार्थना करने की सबसे महत्‍वपूर्ण बातें क्‍या है? यहाँ पर प्राथमिकता महत्‍वपूर्ण है। हम प्राथमिकताओं के बारे में पढे़ंगे।
पहला, हमें आराध्‍ना करनी है। तब हमें माँगना है। परंतु याद रखे, वह उन्‍हे इनाम देता है जो उसे खोजते हैं, इनामों को नही। प्रार्थना में प्राथमिकता प्रार्थना को है। हमें हर चीज से बढ़कर उसके व उसके राज्‍य के प्रति सोचना है।
 
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पाठ 5: एक राज्‍य जिसे खोजना है
कुछ लोगों की अपने जीवन के बारे में बड़ी योजनाएँ होती हैं। मसीही परमेश्‍वर की महिमा एवं परमेश्‍वर के राज्‍य के आगमन की खोज करता है।
 
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पाठ 6: एक योजना है जिसे मानना है
क्‍या आप परमेश्‍वर की इच्‍छा के लिए तैयार हैं? परमेश्‍वर हमारे साथ घटने वाली बातों का इस्‍तेमाल कर हमें मसीह के समान बनाता और उसकी इच्‍छा को पूरे करने के लायक बनाता है। प्रार्थना से हमें पता चलेगा कि परमेश्‍वर ये सब हमारे साथ क्‍यों होने देना चाहता है।
 
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पाठ 7: जीने की जरूरतों का प्रबन्‍ध्‍
अधिक्तर लोग सोचते हैं कि परमेश्‍वर तब भला है जब वह उनकी माँगों को पूरी करता है। परमेश्‍वर ने हमारी सारी जरूरतों को पूरा करने का वायदा किया है। परंतु, वह चाहता है कि हम उसे खोजे क्‍योंकि हम उससे प्रेम करते हैं, इसलिए नही कि वह हमें कुछ देता है।
 
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पाठ 8: सामाजिक जरूरतों का प्रबन्‍ध्‍

क्‍या एक क्ष्‍ामाहीन आत्‍मा के साथ प्रार्थना करना एवं परमेश्‍वर के उत्तर की प्रतीक्षा करना मुमकिन है? क्‍या हम अपने भाइर् से घ्रणा करने के बावजूद परमेश्‍वर की आराध्‍ना कर सकते हैं? क्‍या हम उन लोगों के लिए प्रार्थना कर सकते हैं जिन्‍हे हम पसंद नही करते?
प्रार्थना और आराध्‍ना दूसरों के प्रति हमारे व्‍यवहार को भी प्रभावित करता है। यदि हमारी प्रार्थना हमारे पड़ोसी से प्रेम नही करवा सकती है तो इसका क्‍या अर्थ या उद्देश्‍य है?
 
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पाठ 9: पवित्रता की जरूरतों का प्रबन्‍ध्‍
विजयी बनने के लिए हमारे जीवन में हमें प्‍रमेश्‍वर के सामर्थ की जरूरत है! प्रार्थना में बार बार एक बात को कहना है, ‘‘मैं इसे खुद नही कर सकता। मैं स्‍वयं इसे नही कर सकता। मुझे मदद चाहिए।' यदि हमें विजयी होना है तो हमें पवित्रा आत्‍मा की मदद की अनुमति देनी पड़ेगी
 
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पाठ 10: सुरक्षा की जरूरतों का प्रबन्‍ध्‍

शैतान हमारे विश्‍वासियों को हतोत्‍साहित करने के लिए कड़ी मेहनत करता है। यदि हम प्रभु के द्वारा अपने लोगों के लिए तैयार की गई ‘दीवार' में नही हैं तो वह विजयी हो जाएगा।
परमेश्‍वर जानता है कि जाँचों और परीक्ष्‍ााओं के बिना हम आत्‍मिक रूप से नही बढ़ सकते हैं। अतः परमेश्‍वर समय समय पर सारी दीवारें हटा देता है। वह शैतान को हमें परेशान करने की अनुमति देता है। यह हमारे भले के लिए है, परंतु हम इसकी भलाइर् प्रार्थना और आराध्‍ना के द्वारा ही जान सकते हैं।
आइए, हमारे दास को परेशान करें! और इसमें से ले सकने वाली हर भलाई को लें!
 
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उत्तर कुँजी
 
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