मसीही परिपक्‍वता

 

मसीही परिपक्‍वता
मसीही परिपक्‍वता ‘‘मसीह की पूर्ण देह के समान बनने' तक हर विश्‍वासी का लक्ष्‍य एवं निशाना है। (ईफ.4:13) इस 192 पेजों के पाठ्‌यक्रम में रिक होवार्ड सिखाते हैं कि यद्यपि हम एकदम मसीह के समान नही बन सकते हैं, परंतु हमें बाइबल के द्वारा हमारे सामने रखे इस लक्ष्‍य के सर्वाध्‍कि नजदीक पहुँचना है क्‍योंकि यही हमें मात्रा लक्ष्‍य के पास पहुँचने से कहीं अधिक करने का बल देगा।
 
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पाठ 1: उन्‍नति की दैवीय चाहत
परमेश्‍वर हर व्‍यक्‍ति के साथ एक विकासशील संगति चाहता है। मनुष्‍य भी इस सम्बन्ध को चाहता है और उसे पता है कि वह इसके कारण परमेश्‍वर की संगति से अलग हो चुका है।
यह पाठ्‌यक्रम, जैसे कि पवित्र आत्‍मा भी आपको सिखाए, उन्‍नत होने में आपकी मदद करेगा। उन्‍नत होने के साथ साथ, आप परमेश्‍वरीय परिवार के अंदर नए अध्‍किारों एवं जिम्‍मेदारियों को पहचान सकेंगे।
 
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पाठ 2: यीशु मसीहः उन्‍नति का एक उदाहरण
हमने देखा है कि हमारा स्‍वर्गिक पिता हमारी परिपक्‍वता चाहता है ताकि हम उसके साथ संगति रख सकें। हमें उन्‍नत होकर उस उद्देश्‍य को पूरा करना है जिसके लिए परमेश्‍वर ने हमें अपने स्‍वरूप में रचा है।
‘‘मसीही परिपक्‍वता कैसी लगती है?' आप पूछ सकते हैं। अस अध्‍याय में यही हमारा उद्देश्‍य है। हम दृश्‍ययोग्‍य लक्ष्‍य को पाने में मसीही परिपक्‍वता को स्‍पष्‍ट रूप से परिभाषित करना चाहते हैं।
 
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पाठ 3: उन्‍नति के अध्‍कि उदाहरण
बाइबल में मसीही परिपक्‍वता का प्राथमिक उदाहरण यीशु मसीह हैं। हम मसीहियों को यीशु मसीह के रूप के समान बनना है। मसीही परिपक्‍वता की यही विकासशील उन्‍नति है।
इस पाठ में हम दूसरे उदाहरणों को भी देखेंगे। इनमें परिवार, किसानी एवं भवन निर्माण शामिल हैं। हमारा ध्‍येय मसीही परिपक्‍वता को एकदम स्‍पष्‍ट रूप से देखना है।
 
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पाठ 4: मसीही उन्‍नति की रूकावटें एवं मदद
इस पाठ का एक भाग पवित्र बाइबल में से उन चीजों को दिखाना है जिनके द्वारा मसीही परिपक्‍वता को पाने में देरी होती है या नही पाइर् जाती। दूसरा भाग मसीही उन्‍नति में लाभदायक चीजों की सूची देता है। इन चाजों को जानकर हम पवित्रा आत्‍मा के सहयोग से मसीह में हमारे नए जीवन को विकसित कर सकते हैं। इस अध्‍ययन में हमें एक साथ मिलकर उत्‍साह एवं मदद को पाना है।
 
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पाठ 5: उन्‍नति की ओर प्रोत्‍साहन
माता पिता एवं अध्‍यापक प्रोत्‍साहन देने के लिए अक्‍सर इनामों का उपयोग करते हैं। ये इनाम प्रेरणादायक होते हैं। ये हमें आगे बढ़ने को उत्‍साहित करते हैं। बाइबल में मसीही परिपक्‍वता के लिए कइर् प्रेरणादायकों के बारे में लिखा है। यह अध्‍याय उन्‍ही बाइबल के इनामों के बारे में बताता है।
 
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पाठ 6: मसीही परिपक्‍वता प्रदान करने वाले घटक
उन्‍नतिशील मसीही पवित्रा आत्‍मा के द्वारा आने वाली शिक्षा को पाने के योग्‍य होते हैं। ये शिक्षा मसीही समान लायक बनने के लक्ष्‍य की ओर ले जाती है। विकासशील मसीही अंतिम परीक्षा के प्रति सचेत रहे जो उन्‍हे प्रभु के सामने लेना है। प्‍रिपक्‍व पारिवारिक जिम्‍मेदारी को पाना है। परंतु हम इन लक्ष्‍यों को कैसे प्राप्‍त करें? यह अध्‍याय इन्‍हे पाने के प्रायोगक तरीकों के बारे में बताता है।
 
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पाठ 7: आधरभूत सत्‍य एवं बढ़कर
परमेश्‍वर के वचन में मसीहियों को सिखाया गया यह महत्‍वपूर्ण सिद्धांत हैः हमें स्‍थापित करना है कि हम सीख चुके हैं और आगे बढ़ना है। हमें इसी अध्‍याय को दोहराते नही रहना है। हमारे विकास के दौरान हम बचपन ही में नही बने रहें। हमारे मसीही अनुभव के आधर सुरक्षित रखा जाना है। तब हमें आधरभूत सत्‍यों से बढ़कर बनाना है।
 
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पाठ 8: मसीही स्‍वभाव के प्रमाण
किसी ने पूछा, ‘‘यदि आप मसीही होने के कारण सुनवाइ पर होते, तो क्‍या आपके पास बोध्‍ कराने के काफी प्रमाण होते?' एक अर्थ में, वृहद रूप से यह संसार एक आलत के समान है। अविश्‍वासी तक पहचानते हैं कि विश्‍वासी अपने कहे के अनुसार जी रहा है या नही। ये अध्‍याय परिपक्‍व मसीही जीवन के सर्वाध्‍कि प्रभावशाली प्रमाण को प्रस्‍तुत करता हैः अपने जीवन में प्रभु यीशु के जीवन का प्रगटीकरण।
 
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पाठ 9: उन्‍नति की दैवीय चाहत
यीशु मसीह के रूप की ओर बढ़ने वाले विश्‍वासियों में विशेष प्रमाण होते हैं। प्रथम, वे पारिवारिक समानता रखते हैं। वे अधिक से अधिक मसीह का रूप दिखाते हुए उन्‍नति करते हैं।
विश्‍वासी का कार्य द्वितीय एवं परिपक्‍वता का सापफ प्रमाण है। उन्‍नत विश्‍वासी ही उपयोगी विश्‍वासी है। परिपक्‍वता के बढने के साथ साथ विश्‍वासी अधिक से अधिक जिम्‍मेदारियाँ उठाने के योग्‍य होता है।
 
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पाठ 10: आत्‍मिक परिवर्तन का प्रमाण
यीशु मसीह के द्वारा अपने जीवन में पाए हुए स्‍तर के आधर पर स्‍वयं को नापना कठिन लगता है। खुश हो जाओ! परमेश्‍वर केवल स्‍तर को बनाता ही नही हैऋ परंतु उस लक्ष्‍य तक पहुँचने में हमारी मदद भी करता है। यह प्‍रमेश्‍वर की प्रसन्नता है कि वह कमजोर लोगों को लेता और उनके द्वारा अपनी परिवर्तित करने वाली सामर्थ को दिखाता है। यीशु मसीह में हमारी बुलाहट की यही आशा है।
 
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उत्तर कुँजी
 
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