परमेश्‍वर की रचना - आपका चुनाव

 

परमेश्‍वर की रचना - आपका चुनाव
परमेश्‍वर के पास आपके जीवन की रचना है, परंतु उसकी योजनाओं को मानने या नही मानने का चुनाव उसने आपको दिया है। लोवेल हैरूप के इस पाठ्‌यक्रम में आप परमेश्‍वर की रचना और उन तरीकों के बारे में अध्‍कि जान पाएँगे जिनसे आप उसके पीछे चलने के विकल्‍पों को चुन सकते हो। परमेश्‍वर की रचना एवं हमारे चुनाव का ज्ञान मनुष्‍य के द्वारा हर दिन लिए जाने वाले विभिन्‍न निर्णयों में भटकते वक्‍त उनकी मदद करेगा।
 
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अध्‍याय 1: क्‍या परमेश्‍वर के पास वास्‍तव में रचना है?

मिश्र में पिरामिड के नाम से प्रसि( कई विशाल स्‍मारकें हैं। उनको बनाने के लिए इस्‍तेमाल किए गए पत्‍थर इतनी अच्‍छी तरह से एक दूसरे से जुड़ते थे कि किसी मशीन के द्वारा उन्‍हे जोडने की जरूरत नही पड़ती थी। क्‍या वे अपने आप बन गए?
पत्‍थरों के ढे़रों के साथ हजारों लोगों की कल्‍पना करें। किसको बिना रचना के नही बनाया गया? इस अध्‍याय मे आप प्‍रमेश्‍वर की रचना के बारे में पढ़ेंगे। इतना ही नही, आप यह भी पाएँगे कि परमेश्‍वर के पास आपकी भी येाजना है।
 
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अध्‍याय 2: क्‍या परमेश्‍वर मुझे बताएगा कि आगे क्‍या करना है?
शायद आप परमेश्‍वर की रचना से आपके संबंध्‍ के बारे में विचलित होंगे। इस अध्‍याय में आप देखेंगे कि परमेश्‍वर आपसे बात करना क्‍यों चाहता है। आप उसके द्वारा दिए गए वायदों और प्रबन्‍ध्‍ के बारे में भी सीखेंगे कि आपके लिए उसकी रचना पूरी हो जाए।
 
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अध्‍याय 3: क्‍या परमेश्‍वर बहुत कुछ की प्रतीक्षा करता है?
अक्‍सर जब हम परमेश्‍वर की योजना को देखते हैं, तो हमें यह बहुत बड़ा लगता है। इस अध्‍याय में हम देखेंगे कि जब हम उसके द्वारा हमारे जीवन के लिए रखे गए लक्ष्‍यों को पूरा करने की खोज में रहते हैं तो वह हमारे लिए क्‍या करता है
 
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अध्‍याय 4: क्‍या मैं परमेश्‍वर की रचना को खो रहा हूँ?
अक्‍सर परमेश्‍वर की इच्‍छा को करना आसान लगता है तो कभी कभार मुश्‍किल। अब्रहाम ने भी इस प्रकार के कठिन समयों का सामना किया। परमेश्‍वर आपके विश्‍वास को परखने के लिए अक्‍सर इन परिस्‍थितियों का इस्‍तेमाल करता है। हम सीखेंगे कि हमारी परिस्‍थितियाँ हमारे लिए परमेश्‍वर की रचना से कैसे संबंध्‍ति हैं। अध्‍ययन बे बाद आप पाएँगे कि परमेश्‍वर आपके जीवन की अपनी रचना को प्‍ूरा करने के लिए परिस्‍थितियों का उपयोग कर सकते हैं।
 
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अध्‍याय 5: क्‍या केवल मसीही बने रहना कापफी है?
शायद आपने स्‍वयं से पूछा होगा, ‘‘मेरा वास्‍तविक स्‍वयं क्‍या है? क्‍या मैं वो हूँ वो बाइबल कहती है या क्‍या मैं वो हूँ जो मैं महसूस करता हूँ?' वचन को सीखकर भी हमारे लिए समझना कठिन है कि हम कौन हैं। इस अध्‍याय मेें हम हमारे स्‍वयं के अनुभवों एवं कार्यों के साथ बाइबल के उन कथनों की तुलना करेंगे जो कहते हैं कि हम कौन हैं। हम खोजेंगे कि परमेश्‍वर किस बात को महत्‍वपूर्ण समझता है। तब हम पढ़ेंगे कि हम परमेश्‍वर के द्वारा प्रतीक्षित व्‍यक्‍ति कैसे बन सकते हैं।
 
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अध्‍याय 6: परमेश्‍वर मुझसे बात कैसे कर सकता है?
यह अध्‍याय सिखाएगा कि परमेश्‍वर हमसे कैसे बात करता है।
 
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अध्‍याय 7: क्‍या यीशु मसीह परमेश्‍वर की रचना जानते हैं?
चेलों ने महान वायदा दिखाया। इन चेलों को इतना विशेष उसके द्वारा अपने कामों में डाली गई योग्‍यता ने बनाया। क्‍या ये परिभाषा बता सकती है कि यीशु एक बालक के रूप में कैसे थे? हम इतना जानते हैःं उसका बचपन वास्‍तविक था। पुत्रा परमेश्‍वर के रूप में, मसीह अवश्‍य अनंतता की योजना को जानते थे। परंतु मनुष्‍य बनने में, उसने सीखने एवं प्रार्थना के द्वारा परमेश्‍वर के साथ बात करने में मानवीय तरीके का चुनाव किया।
 
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अध्‍याय 8: मैं भविष्‍य का सामना कैसे करूँ?
मनुष्‍य में ऐसा क्‍या है कि वह हमेशा भविष्‍य जानने की कोशिश में रहता है? क्‍या यह गलत है? इस अध्‍याय मेें, आप पाएँगे कि परमेश्‍वर चाहता है कि आप भविष्‍य और उसके द्वारा प्रकट बातों को देखें। इसे पाने के लिए, आप भविष्‍य के लिए परमेश्‍वर की रचना, परमेश्‍वर अपने प्रकाशन को सीमित क्‍यों करता है एवं आज के लिए परमेश्‍वर की रचना इत्‍यादि के बारे में सीखोगे।
 
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छात्र रिपोर्ट
 
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